पाठ्यक्रम

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Methodology

इस कोर्स के पीछे हमारा एक ही मकसद है. आपको तीन महीनों के भीतर कॉपीराइटर बनाना. इसलिए इस कोर्स की हर चीज इस मकसद को पूरा करने में सहायता करती है. इसे इस तरह समझें.

अगर आपको हलवा बनाना है तो आप इन चीजों पर निर्देश चाहेंगे :

  • कौन-कौन सी खाद्य सामग्री लायें 
  • उस सामग्री को कैसे पकायें

आप एक्शन खोज रहे हैं. वो एक्शन जो मकसद पूरा करे. 

आप सिर्फ जानकारी इकट्ठा नहीं करना चाहते. 'हलवे में सूजी का इस्तेमाल पहली बार किस देश में हुआ?', 'चीनी में कितनी कैलोरी होती है?'

सही है ना?

हर एक्शन को करने के लिए आपको अभ्यास करना होगा उन चीजों का जो वास्तविक जीवन पर आधारित हों. जैसे कि अगर आप किसी एजेंसी में कॉपीराइटर हैं और आपको एक रेस्टोरेंट का ad बनाना हो तो आप क्या  करेंगे? 

जहां तक जानकारी की बात है, आपको वो चीज जाननी बहुत जरुरी है जो आपको आपके काम में मदद करे. अगर उस जानकारी से आपके काम में फायदा न हो तो उसे इकठ्ठा करने से कोई फायदा नहीं है. 

हमारे सिलेबस

में क्या-क्या है? 

  • एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री की जानकारी
  • क्रिएटिव ब्रीफ को समझना और लिखना 
  • नए आईडिया देने का अभ्यास 
  • प्रिंट ऐड : हैडलाइन, बॉडीकॉपी, टैगलाइन/स्लोगन लिखने का अभ्यास
  • प्रभावकारी और सटीक बॉडीकॉपी लिखना 
  • विजुअल और कॉपी का संतुलन बनाना; लेआउट
  • टीवी और रेडिओ के लिए आईडिया लाना और स्क्रिप्ट लिखना 
  • डिजिटल और न्यू मीडिया advertising का परिचय : न्यू मीडिया, क्रिएटिव स्ट्रेटेजी की समझ, paid और सोशल मीडिया कैम्पेन को कार्यान्वित करना 
  • हिंदी कॉपीराइटिंग के लिए विशेष ट्रेनिंग